फोन आता है: «हम CBI/पुलिस/कस्टम्स से बोल रहे हैं। आपके आधार से जुड़ा पार्सल पकड़ा गया है जिसमें ड्रग्स हैं» या «आपके नाम पर मनी लॉन्ड्रिंग का केस है»। फिर वीडियो कॉल पर वर्दी वाले «अधिकारी» आपको «डिजिटल अरेस्ट» में रखते हैं — घंटों कैमरे के सामने, और «जमानत» या «जांच» के नाम पर पैसे ट्रांसफर करवाते हैं। यह भारत का सबसे खतरनाक नया स्कैम है।
• असली पुलिस कभी फोन/वीडियो कॉल पर «गिरफ्तार» नहीं करती — डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई कानूनी चीज़ नहीं है • डर और जल्दबाज़ी: «अभी पैसे भेजो वरना गिरफ्तारी होगी» • कैमरे के सामने रहने और किसी को न बताने का दबाव • «सरकारी» खाते में RTGS/UPI से पैसे मांगना — सरकार कभी ऐसे पैसे नहीं लेती
• तुरंत कॉल काट दें — बात जारी रखना ही जाल है • परिवार को बताएं; स्कैमर सबसे पहले «किसी को मत बताना» कहते हैं • 1930 (साइबर क्राइम हेल्पलाइन) पर रिपोर्ट करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत करें • संदिग्ध मैसेज मिला? Phishy में पेस्ट करें — सेकंडों में हिंदी में जवाब
यह स्कैम खासकर बुज़ुर्गों और रिटायर्ड लोगों को निशाना बनाता है — कई मामलों में लोगों ने जीवन भर की बचत गंवाई है। अपने माता-पिता को आज ही बताएं: पुलिस फोन पर गिरफ्तार नहीं करती, और सरकारी जांच में पैसे ट्रांसफर नहीं होते।
Phishy से संदिग्ध मैसेज सेकंडों में जांचें — हिंदी में, बड़े अक्षरों में, साफ जवाब। और फैमिली मोड से आप माता-पिता के फोन से जुड़ सकते हैं (उनकी सहमति से): उन तक कोई स्कैम पहुंचे तो आपको अलर्ट मिलेगा — उनके निजी मैसेज देखे बिना।
नहीं। «डिजिटल अरेस्ट» कानून में मौजूद ही नहीं है। ऐसा कहने वाला हर कॉल 100% स्कैम है।
तुरंत 1930 पर कॉल करें और अपने बैंक को बताएं — जल्दी रिपोर्ट करने पर पैसे फ्रीज़ होने की संभावना रहती है। cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें।
मैसेज कॉपी करके Phishy में पेस्ट करें — मुफ्त जांच हिंदी में उपलब्ध है, तुरंत बताती है कि खतरा है या नहीं।