«डिजिटल अरेस्ट» भारत का सबसे खतरनाक और तेज़ी से बढ़ता फ्रॉड है, जिसमें लोग लाखों रुपये गँवा चुके हैं। ठग खुद को CBI, कस्टम, पुलिस, TRAI या ED का अधिकारी बताकर वीडियो कॉल करते हैं, कहते हैं कि आपके नाम से पार्सल में ड्रग्स या अवैध सामान मिला है, और आपको घंटों तक कैमरे के सामने «डिजिटल अरेस्ट» में रखते हैं जब तक आप «जाँच शुल्क» या «ज़मानत राशि» ट्रांसफर न कर दें। सबसे पहले यह याद रखें: भारत में «डिजिटल अरेस्ट» जैसी कोई चीज़ कानून में है ही नहीं। कोई असली पुलिस या एजेंसी वीडियो कॉल पर आपको गिरफ्तार नहीं करती।
पहला कॉल अक्सर रिकॉर्डेड होता है: «आपका पार्सल कस्टम में रोका गया है», «आपके आधार से जुड़ा सिम अवैध गतिविधि में इस्तेमाल हुआ», या «आपके खाते से मनी लॉन्ड्रिंग हुई है»। फिर कॉल एक «अधिकारी» को ट्रांसफर होती है जो वीडियो कॉल पर आ जाता है — पीछे पुलिस स्टेशन जैसा सेट, वर्दी, नकली ID। वह आपका नाम, पता, कभी-कभी आधार नंबर तक बता देता है (जो लीक डेटा से मिलता है), जिससे सब असली लगने लगे।
अधिकारी कहता है कि मामला गंभीर है और आपको «निगरानी» में रहना होगा — कैमरा चालू रखें, किसी को बताएँ नहीं, कहीं जाएँ नहीं। यह घंटों, कभी दिनों तक चलता है। लगातार डर और अकेलेपन में रखकर वे आपको सोचने का मौका नहीं देते। फिर «केस बंद करने» या «निर्दोष साबित होने तक पैसे सुरक्षित रखने» के नाम पर आपसे «RBI verified account» में पूरी रकम ट्रांसफर करवा लेते हैं।
• कोई भी असली एजेंसी वीडियो कॉल पर पूछताछ या «गिरफ्तारी» नहीं करती • «डिजिटल अरेस्ट» नाम की कोई कानूनी प्रक्रिया मौजूद नहीं • पैसे को «सुरक्षित» रखने या «जाँच» के लिए ट्रांसफर करने को कहा जाए — असली जाँच में ऐसा कभी नहीं होता • किसी को न बताने और कैमरा चालू रखने का दबाव • तुरंत कार्रवाई की धमकी («वारंट», «गिरफ्तारी») • WhatsApp या Skype पर «आधिकारिक» कॉल — सरकारी एजेंसियाँ ऐसे संपर्क नहीं करतीं
1. फ़ोन काट दें। असली एजेंसी फ़ोन पर गिरफ्तार नहीं करती। 2. घबराएँ नहीं और किसी भी हालत में पैसे ट्रांसफर न करें। 3. परिवार के किसी सदस्य को तुरंत बताएँ — ठग अकेलेपन पर ही टिके होते हैं। 4. संदिग्ध मैसेज या लिंक को इस पेज पर मुफ़्त Phishy चेकर में पेस्ट करके जाँचें। 5. 1930 (साइबर क्राइम हेल्पलाइन) पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर रिपोर्ट करें।
अगर फ्रॉड SMS, WhatsApp मैसेज या लिंक से शुरू हुआ है, तो उसे कॉपी करके इस पेज पर मुफ़्त Phishy चेकर में पेस्ट करें। टूल लिंक को उसके असली ठिकाने तक फ़ॉलो करता है, दुनिया भर के फ्रॉड डेटाबेस से मिलाता है, और सेकंडों में साफ़ जवाब देता है: सुरक्षित, संदिग्ध या फ्रॉड — बिना किसी रजिस्ट्रेशन के।
1. तुरंत 1930 पर कॉल करें — जितनी जल्दी रिपोर्ट, ट्रांज़ैक्शन रुकने/वापसी की संभावना उतनी ज़्यादा (गोल्डन ऑवर)। 2. cybercrime.gov.in पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें। 3. अपने बैंक को फ़ोन करके खाता और कार्ड फ्रीज़ करवाएँ। 4. सभी सबूत सहेजें: कॉल रिकॉर्ड, स्क्रीनशॉट, ट्रांज़ैक्शन डिटेल। 5. शर्मिंदा न हों — यह एक पेशेवर, संगठित ठगी है जिसमें पढ़े-लिखे लोग भी फँसते हैं।
नहीं। भारतीय कानून में «डिजिटल अरेस्ट» जैसी कोई प्रक्रिया है ही नहीं। कोई भी असली एजेंसी वीडियो कॉल पर आपको गिरफ्तार या «निगरानी» में नहीं रख सकती।
यह 100% फ्रॉड है। कॉल काट दें, पैसे न भेजें, और 1930 पर रिपोर्ट करें। असली एजेंसियाँ फ़ोन पर पैसे नहीं माँगतीं।
नहीं। ठग लीक हुए डेटा से आपकी जानकारी जुटाते हैं ताकि भरोसा बने। सही जानकारी होना यह साबित नहीं करता कि कॉल असली है।
तुरंत 1930 पर कॉल करें और बैंक को खाता फ्रीज़ करने को कहें। पहले कुछ घंटे सबसे अहम होते हैं।
इस पेज पर मुफ़्त Phishy चेकर में मैसेज पेस्ट करें — बिना लिंक खोले, सेकंडों में जवाब मिल जाएगा।